पहले पुलिस, नेता,फिर ठीकेदार और अब पत्रकार इन सब से समाज का विश्वाश उठ रहा है ,फिर तो इस लोकतंत्र को कौन बछायेगा ,कृपया दूषित मानसिकता क़े लोग पत्रकारिता न करे समाज का बरा ही भला होगा.
Sunday, September 5, 2010
aaj पत्रकारों द्वारा कियागया गलत कार्य समाज को अचंभित कर देता है.समाज कल takइन्ही पर भरोसा करता था पर इनके कुकृत्य सेलोक्तंत्र अनाथ होगया है.कोई तोसुनो............?